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HMPV Virus: पैनिक न हों, Covid जितना घातक नहीं है HMPV, यहां जानें पूरी जानकारी

HMPV Virus: पैनिक न हों, Covid जितना घातक नहीं है HMPV, यहां जानें पूरी जानकारी

HMPV Virus

Health Desk. देश भर में इन दिनों ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस यानी एचएमपीवी पर चर्चा हो रही है. इस वायरस को लेकर लोग अलग अलग दावे कर रहे हैं. कुछ लोग इसको कोरोना से जोड़कर भी देख रहे हैं. जब इस वायरस पर अलग अलग हेल्थ एक्सर्ट्स से बात की गई तो निकल कर आया कि ये वायरस कोविड जितना घातक नहीं है. ना ही ये कोई नया वायरस है. इसलिए इसको लेकर पैनिक होने की जरूरत नहीं है. कुछ सावधानी से ही इस वायरस को हराया जा सकता है.

देश में कुल 11 मरीज, यूपी के इस शहर में हुई ये व्यवस्था
ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस यानी एचएमपीवी के दो और नए मरीजों की पुष्टि गुरुवार को देश में हुई है. केस सामने आने के बाद राज्यों ने भी सतर्कता बढ़ा दी है. पंजाब में बुजुर्गों और बच्चों को मास्क पहनने की सलाह दी गई है. दूसरी तरफ गुजरात में अस्पतालों में इसके लिए आइसोलेशन वार्ड बनाए जा रहे हैं. हरियाणा में भी स्वास्थ्य विभाग को एचएमपीवी केसेस पर निगरानी रखने के आदेश दिए गए हैं. शहर में बड़ी संख्या में पर्यटक देश विदेश से ताज का दीदार करने आते हैं इसको देखते हुए शहर में भी इसके लिए अलर्ट जारी कर दिया गया है. इसके लिए रैपिड रिस्पांस टीम गठित कर कंट्रोल रूम भी बना दिया है. और हेल्पलाइन नंबर जारी कर दिए गए हैं. वहीं विदेशों से एयरपोर्ट पर आने वाले पर्यटकों की स्क्रीनिंग के आदेश जारी कर दिए गए हैं.

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छोटे बच्चे हो सकते हैं प्रभावित
एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा में फिजीशियन डॉ मनीष बंसल बताते हैं कि एचएमपीवी वायरस से छोटे बच्चे यानी पांच साल से छोटे बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं. इस वायरस से छोटे छोटे बच्चे जिनकी इम्युनिटी पावर कमजोर होती है. उनको निमोनिया के चांस बढ़ जाते हैं. एसएन में इसके लिए ओपीडी में लोगों को बताया भी जा रहा है. इसके अलावा केंद्र सरकार ने राज्यों को इन्फ्लूएंजा लाइक इलनेस और सीवर एक्यूट रेस्पिरेटरी इश्यू जैसी सांस की बीमारियों की निगरानी बढ़ाने और एचएमपीवी के बारे में जागरूकता करने के लिए कहा है.

इस तरह फैलता है एचएमपीवी
एचएमपीवी वायरस खांसने और छींकने से फैल सकता है. इसके अलावा ये वायरस संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी फैल सकता है. संक्रमित व्यक्ति से हाथ मिलाने, वायरस से संक्रमित किसी वस्तु को छूने से भी एचएमपीवी फैल सकता है. एचएमपीवी के लक्षण संक्रमित होने के बाद 3 से 5 दिनों में दिखने लगते हैं.

इसलिए नहीं है कोविड जितना घातक
-कोविड में मरीज के डेथ के चांस अधिक थे. जबकि एचएमपीवी में नहीं है.
-कोविड एचएमपीवी की अपेक्षाकृत अधिक तेजी से फैलता है जबकि इसमें ऐसा नहीं है
-कोविड एकदम न्यू वायरस था. जबकि एचएमपीवी कोई नया वायरस नहीं है.
-कोविड के लिए ह्यूमन बॉडी में कोई भी इम्यूनिटी मौजूद नहीं थी. जबकि एचएमपीवी के लिए संभावना है.
-एचएमपीवी जैसे वायरस की वजह से बच्चों में निमोनिया होता है. जबकि कोविड की कोई हिस्ट्री नहीं थी.
-एचएमपीवी में मरीजों को रिकवर होने के चांस 99 प्रतिशत हैं. जबकि कोविड में ऐसा नहीं था.
-कोविड के लक्षण हाई डिग्री थे जबकि एचएमपीवी में ऐसा नहीं है.
-कोविड वायरस नया था. उससे निपटने के इंतजाम सरकार के पास नहीं थे.
-कोविड के बाद स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी से बदलाव हुआ है. सरकार ऐसी किसी भी बीमारी से निपट सकती है.
-कोविड का इलाज शुरूआती फेज में नहीं था. एचएमपीवी का इलाज हो सकता है.

इन लोगों को हो सकता है एचएमपीवी से खतरा-
-हार्ट पेशेंट
-वीक इम्यूनिटी वाले लोग
-बच्चे
-स्टेरॉयड लेने वाले लोग
-लिवर के पेशेंट
-लंग्स डिजीज के पेशेंट
-बुजुर्ग
-गंभीर बीमारी से पीड़ित लोग

ये हैं लक्षण
-खांसी
-गले में दर्द
-बुखार
-सांस लेने में समस्या
-गले में खराश
-सर्दी लगने जैसे लक्षण

इन बातों का रखें ख्याल
बुखार, छींक, खांसी और गले में खराश पर मास्क यूज करें
हाथों की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें
भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें
बिना वजह अस्पताल जाने से बचें
संभव हो तो मास्क पहनें

एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा में फिजिशियन डॉ मनीष बंसल फिजीशियन बताते हैं कि इस तरह के वायरस पहले भी आ चुके हैं. इन्फ्लूएंजा भी इसी तरह का वायरस है. एचएमपीवी वायरस के लिए इलाज है ये कोविड जितना घातक भी नहीं है. इसके लिए दवा भी है. मरीजों के ठीक होने के चांस अधिक है.