आगरा. ये शहर वैसे तो इतिहास का शहर कहा जा सकता है. कहें भी क्यों नहीं. इस शहर में एक से बढ़कर एक ऐतिहासिक धरोहरें मौजूद हैं. ये शहर इतिहास की धरोहरों को सहेज रहा है. इसलिए इसकी पहचान एक अलग ही है. लेकिन बात अगर भक्ति की हो तो इस शहर को मिनी काशी कहने में कोई गुरेज नहीं है. दरसल सावन महीने में ये शहर शिव की भक्ति में डूब जाता हैं. सावन में शहर के चारों कोनों पर स्थित शिव मंदिरों पर भक्तों की भीड़ के साथ शिव की भक्ति में ये शहर पूरा शिवमय हो जाता है. शहर के पूर्व में बल्केश्वर, पश्चिम में पृथ्वीनाथ, उत्तर में कैलाश और दक्षिण में राजेश्वर शिव मंदिर स्थित हैं. हर मंदिर की अलग महिमा है. इन्ही में से एक मंदिर है शहर के शाहगंज स्थित प्राचीन मंदिरों में शुमार पृथ्वीनाथ महादेव. यहां सावन के चौथे सोमवार को मेला लगता है.
आगरा का एकमात्र महादेव मंदिर जहां होती है भस्म महाआरती
सावन के चौथे सोमवार को शाहगंज स्थित प्राचीन पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर का भव्य और विशाल मेला लगता है. सावन मास में इस मंदिर में बाबा महोदव को जल चढ़ाने का विशेष महत्व है. मंदिर परिसर में छोटे महादेव और हनुमानजी भी विराजमान हैं. यह आगरा का एकमात्र महादेव मंदिर है, जहां महादेव की भस्म महाआरती होती है. पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर पर सैकड़ों सालों से मेले का आयोजन किया जाता है. इस दिन भगवान महादेव का विशेष श्रृंगार भी किया जाता है.
800 साल से अधिक पुराना है मंदिर
मंदिर महंत अजय राजौरिया बताते हैं कि ये मंदिर करीब 800 साल पुराना है यहां घना जंगल और खेत खलिहान थे. आगरा में राजस्थान की ओर जाने और आने का ये क्षेत्र प्रवेश द्वार था. जिस जगह पर बाबा महादेव विराजमान हैं. यहां पर एक कुआं और छोटा धर्मशाला था. यहां राहगीर रुकते थे. रात्रि विश्राम भी यहां पर करते थे. इसके वाद आगे की यात्रा करते थे. मंदिर के एक तल के नीचे शिवजी पूरे परिवार के साथ विराजमान हैं. ये दुनिया का अनोखा शिवलिंग है, जिसमें भगवान शिव और उनका परिवार विराजमान है.
