गाजीपुर के किसान रंग बहादुर सिंह ड्रैगन फ्रूट की खेती कर हर साल लाखों कमा रहे हैं. खेती के लिए उन्होंने सबसे पहले वाराणसी से ड्रैगन फ्रूट का पौधा मंगवाया और इसकी खेती करते थे.
UPNEWS;यूपी के गाजीपुर में अभी तक परंपरागत खेती के तहत गेहूं धान और सब्जियों की खेती होती रही है. यहां आज भी काफी लोगों का गुजारा खेती करके चलता है, हालांकि अब कुछ प्रगतिशील किसान परंपरागत खेती से हटकर आधुनिक खेती कर रहे हैं. ऐसे ही गाजीपुर के किसान रंग बहादुर सिंह हैं, जो हमेशा नए-नए तकनीक का प्रयोग करते रहते हैं और खेती करते हैं. बहादुर सिंह ने इसी नई तकनीक के तहत अब उन्होंने ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन शुरू कर दिया है. आज बहादुर इसी तकनीक के जरिए खुद को साबित कर दूसरों काे प्रेरणा दे रहा है.
पूरे जनपद में विख्यात है औषधीय खेती
बहादुर सिंह के एक हेक्टेयर में 1200 किलो ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन हो रहा है. ऐसे में सभी लागत निकाल कर बहादुर सिंह 7 से 8 लाख रुपए की सालाना बचत कर रहे हैं. गाजीपुर के सेवराई तहसील के अमौरा गांव के रहने वाले किसान रंग बहादुर सिंह आधुनिक और औषधीय खेती के लिए पूरे जनपद में विख्यात हैं. किसानों के लिए बहादुर सिंह मिसाल बन गए है. बहादुर सिंह को आयुष पंडित की भी उपाधि मिल चुकी है.
प्रति एकड़ कमा रहा लाखों रुपये
बहादुर सिंह ने परंपरागत खेती के बजाय जब से आधुनिक खेती में कदम रखा है तब से वह पीछे मुड़ने का नाम नहीं ले रहे हैं. सिंह ड्रैगन फ्रूट की खेती आरंभ कर प्रतिवर्ष लाखों का लाभ उठा रहे हैं. सिंह ने एक हेक्टेयर खेत में ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन करते हुए करीब 1200 किलोग्राम पैदा किया है, जिसमें लागत निकालकर लाभ की बात कर तो करीब सात से आठ लाख रुपए कि उनकी बचत हो जा रही है.
आसपास के किसानों को करते हैं पौधे की बिक्री
खेती के लिए उन्होंने पहले वाराणसी से ड्रैगन फ्रूट का पौधा मंगवाया और इसकी खेती करते थे. वहीं अब वह अमेरिकन ब्यूटी 7 वैरायटी के पौधे का खेती करते हैं जो साइज में बड़ा होने के साथ ही इसमें मिठास अधिक होती है.बहादुर सिंह ने ड्रैगन फ्रूट की खेती करने के साथ ही साथ अब आसपास के किसानों को ड्रैगन फ्रूट के पौधे की बिक्री भी करना शुरू कर दिए हैं, जिससे अन्य किसान भी इसकी खेती कर लाभ कमा सके.
औषधि खेती के माने जाते हैं जनक
सिंह इसके लिए ₹60 प्रति पौधे के हिसाब से किसानों को पौधा देते हैं. वह अपने फल को वाराणसी की मंडियों में भेजते हैं. साथ ही स्थानीय बाजार में भी बेचने का प्रयास करते हैं ताकि उस पर लागत कम आए और मुनाफा अधिक हो. रंग बहादुर सिंह औषधि खेती के गाजीपुर में जनक भी माने जाते हैं. वह कई तरह के जड़ी बूटियां की खेती करने के साथ ही साथ कई तरह के असाध्य बीमारियों का इलाज भी (वैद्य परम्परा) विधि से करते हैं. ऐसे में उनके पास मरीज का भी आना-जाना लगा रहता है और कई मरीज तो इनके इलाज से संतुष्ट ही नहीं हुई बल्कि निरोग भी हो चुके हैॅ
Swati Bhatia
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